प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट पर निबंध

 

सारी दुनिया में प्लास्टिक से बनी चीज़े

इस्तेमाल में लायी जाती है।

इसके चलते प्लास्टिक से बनी चीज़े

हमारे जीवन का अभिन्न अंग है।

 

प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट पर निबंध…

 

क्या आप जानते है की पूरी दुनिया में

प्रति वर्ष लगभग 150 मिलियन टन

प्लास्टिक का उत्पादन किया जाता है।

 

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प्लास्टिक का उपयोग ज्यादातर पैकेजिंग बैग्स,

शॉपिंग बैग्स, डिब्बे, कपडे, खिलोने, और

दैनिक एवं इंडस्ट्रीज में भी किया जाता है।

 

70% से ज्यादा चीज़े कम समय में

ही वेस्ट में तब्दील हो जाती है।

 

भारत में 60% से ज्यादा

प्लास्टिक वेस्ट रीसायकल हो जाता है।

हालांकि गौर करने वाली बात है की

60% रीसायकल किये जाने के बावजूद

भी ढेरो टन प्लास्टिक वेस्ट प्रदुषण के

लिए जिम्मेदार होता है।

 

जबकि ताजुब की बात ये है की

भारत का रीसाइक्लिंग रेट

अन्य देशो के मुकाबले बहुत ज्यादा है।

जहा भारत 60% रीसायकल करता है,

वही अन्य देशो में

ये 20% ही हो पाता है।

 

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क्या आप जानते है की

प्लास्टिक वेस्ट को जमीन

में गलने में लगभग

450 साल तक का समय

लग जाता है।

 

प्लास्टिक रीसाइक्लिंग भी

एक समय तक ही कारगर है।

क्योंकि प्लास्टिक की रीसाइक्लिंग की

वजह से वो पर्यावरण के लिए घातक

मानी गयी है।

 

इसी वजह से प्लास्टिक रीसाइक्लिंग

को एक सुरक्षित एवं स्थायी समाधान

नहीं माना जाता है।

 

प्लास्टिक का पर्यायी…

 

जैसा की प्लास्टिक बहुत ही हल्का

होता है।

साथ ही ये किसी भी प्रारूप में

ढल जाता है।

और कम लागत में उपलब्ध होता है।

बिना कोई मेंटेनेंस के चलता जाता है।

ये बहुत लचीला होता है।

 

इसी वजह से इसका कोई स्थायी

पर्यायी नहीं मिल पाया है।

हालांकि वैज्ञानिक भी इसके शोध में

अध्ययन कर रहे है।

 

प्लास्टिक के दुष्प्रभाव:- 

 

प्लास्टिक की बहुत सी विशेषकर खूबियों के

चलते दुनिया में प्लास्टिक का उपयोग

बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है।

परन्तु इसके प्रकृति पर

असंख्य दुष्प्रभाव है।

 

क्योंकि यह मिट्टी में

गलता नहीं है।

ये जमीन को

बंजर कर सकता है।

 

यह एक केमिकल प्रक्रिया के

द्वारा तैयार किया जाता हैं।

जब इसे कचरा समझ कर मिट्टी में

दफ़न किया जाता हैं,

तो कुछ समय पश्चात

ये केमिकल्स मिट्टी में घुलने से

पानी के बहाव से तालाबों और नदियों

में जाता हैं जिससे वहाँ के जीवों

को हानि पहुँचती हैं।

 

यहाँ तक की महासागर में

पल रहे plankton जो की

वहाँ के सबसे छोटे जीव होते हैं

उन्हें तक हानि पहुंचाता हैं।

 

पुरे विश्व में सबसे ज्यादा

प्लास्टिक वेस्ट एशिया महाद्वीप में हैं।

 

एक अध्ययन के अनुसार,

83% पीने के पानी में प्लास्टिक की

मात्रा पायी गयी हैं।

जिस की वजह से कैंसर जैसी बिमारी

सकती हैं।

 

बहुत से नवजात शिशुओं

के रक्त में भी प्लास्टिक

की मात्रा पायी गयी है।

 

एक रिसर्च के अनुसार,

वर्ष 2050 तक

महासागर में मछलियों की

जगह प्लास्टिक मिलेगी।

मछलियों का अस्तित्व खत्म होने

वाला हैं।

 

प्लास्टिक को जलाने से

तैयार हो रहे हैलोजन नामक

केमिकल्स की वजह से

इंसानो को कैंसर,

न्यूरोलॉजिकल विकार, अस्थमा,

आदि का खतरा बना हुआ हैं।

 

भारत में प्लास्टिक वेस्ट:- 

 

भारत में ही हर वर्ष

लगभग 1 करोड़ टन से

ज्यादा का प्लास्टिक वेस्ट

बनता है।

 

उसमे से  60% से ज्यादा मतलब की

लगभग 60 लाख टन  रीसायकल किया जाता है।

 

 

बचे हुए 40% प्लास्टिक वेस्ट को

तो इकठ्ठा नहीं किया जाता है।

उसे कूड़े के ढेर बनाके भारत के

कई इलाको में छोड़ दिया जाता है।

 

हमारे शहरो के

बाहरी इलाके में कचरो का

जो ढेर दिखाई पड़ता है वो इस 40%

का हिस्सा है।

 

भारत में महाराष्ट्र राज्य में

ही प्लास्टिक वेस्ट की मात्रा ज्यादा है।

 

लिंक:- https://www.statista.com/statistics/1168513/india-amount-of-plastic-waste-by-state/

(यह रिसर्च वर्ष 2019 तक का ही है।)

 

यह सब कारणों की वजह से

भारत का कार्बन उत्सर्जन में

बड़ा योगदान है।

 

 

प्लास्टिक के प्रकार:- 

 

प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट से पहले यह जानना जरुरी है

की प्लास्टिक कितने प्रकार के होते है।

 

आमतौर पर

प्लास्टिक दो प्रकार के होते है।

 

A) थर्मोप्लास्टिक्स:-

 

इस प्रकार की प्लास्टिक को गर्म करने के

बाद जो किसी भी आकर में ढल जाती है।

वो होती है थर्मोप्लास्टिक्स।

 

उदाः- PET , PVC

 

B) थर्मोसेट्स:-

 

इस प्रकार की प्लास्टिक को गर्म करने पर

वो किसी भी आकार में नहीं ढलती

बल्कि इसके विपरीत और ज्यादा

मजबूत होती जाती है। वे है

थर्मोसेट्स

 

उदाः- Bakelite

 

 

 

प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट:-

प्लास्टिक कचरा व्यवस्थापन

 

आजकल भारत में बायोडिग्रेडेबल – प्लास्टिक

पर काफी जोर दिया जा रहा है।

 

भारत सरकार ने वर्ष 2016 में

प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियमावली (PWM)

की घोषणा की थी जो

प्लास्टिक के उपयोग

में कमी का प्रयास है।

 

 

प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियमावली (PWM):-

 

यह नियमावली प्रत्येक

स्थानीय निकाय, ग्राम पंचायत

उद्योजक, दुकानदार आदि पर लागू होती है।

 

प्लास्टिक कचरा व्यवस्थापन निबंध

 

इस नियमावली के अनुसार,

 

किसी भी दुकानदार को

पन्नी 50 microns की या उससे ऊपर की

ही इस्तेमाल करने की अनुमति है।

 

किसी भी कार्यक्रम प्रायोजक या

संस्था को कचरा हर कार्यक्रम के बाद

अधिकृत एजेंसी को सौपना आवश्यक है।

नियम का उल्लंघन करने पर हर्ज़ाना भरना होगा।

 

स्थानीय निकाय रास्तों के निर्माण के

लिए प्लास्टिक वेस्ट का उपयोग को

प्रोत्साहित करे।

 

इसके साथ ही हर वर्ष भारत में

लगभग 2 करोड़ प्लास्टिक की बोतल

कचरे में फेंकी जाती है।

इस आंकड़े को कम करने के लिए

घर से स्टील की बोतल में

पानी ले जाने का सुझाव दिया गया है।

 

इन्ही सब नियमो का

पालन करते हुए

महाराष्ट्र में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक

पर प्रतिबन्ध लगाया गया है।

 

कुछ समय पहले

इसी नियमावली में

बदलाव करते हुए

वर्ष 2022 तक

भारत में सिंगल यूज़ प्लास्टिक

पर पूर्ण बैन लगाने का

लक्ष्य तय किया गया है।

 

 

इन्ही सब कदमों से प्लास्टिक का

उपयोग धीरे धीरे कम हो जाएगा।

जिससे  प्राणियों का जीवन

आनंदपूर्ण हो सकेगा।

साथ ही पर्यावरण को भी

हानि नहीं होगी।

 

 

प्लास्टिक जितना मानव

जीवन को सरल बनाने में

उपयोगी है साथ ही इसके

बहुत से दुष्प्रभाव भी है।

इसीलिए प्लास्टिक का उपयोग

जिम्मेदारी के साथ करें।

 

धन्यवाद्….!!!

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