जानिए Missile-Man के बारे में…….

 

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15th October 2021 जो की भारत के पूर्व राष्ट्रपति

Dr.APJ Abdul Kalam की 90th जन्म-जयंती है।

 

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सारी दुनिया उन्हें

भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं एक वैज्ञानिक,

शिक्षक के रूप में जानती है।

पर इन सब के साथ-साथ वे धर्म-निरपेक्ष एवं

एक बहुत आदर्श इंसान थे।

आइये इस मौके पर जानते है कलाम साहब के बारे में…………..

 

 

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कलाम साहब का बचपन:-

 

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वर्ष 1931 में,

उनका जन्म तमिल-नाडु के रामेश्वरम में एक साधारण मुस्लिम परिवार में हुआ था।

 

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उनका पूरा नाम अबुल पकिर जैनुलब्दीन अब्दुल कलाम था।

सब उन्हें कलाम नाम से पुकारते थे।

वे अपने पुश्तैनी घर में रहते थे।

उनके पिता की दोस्ती रामेश्वरम राम मंदिर के मुख्य-पुजारी

पक्षी लक्ष्मण शास्त्री से थी।

वे अक्सर अपनी माँ के साथ

किचन में बैठकर केले के पत्तो पर भोजन किया करते थे।

 

6 वर्ष की आयु में वे अपने पिता के साथ पास के

धनुषकोडी में श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए नाव बनाने में जुट गए।

उनके साथ इस काम में उनके ही रिश्तेदार अहमद जलालुदीन ने साथ दिया

जो बाद में उनकी बहन झोहरा के पति बने।

 

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उस समय रामेश्वरम में किताबे नहीं पढ़ी जाती थी।

तो कलाम साहब का किताबो से वास्ता

उस समय के क्रांतिकारी STR Manickam के द्वारा हुआ था।

 

शम्सुद्दीन जो की कलाम साहब के चचेरे भाई थे।

उनका भी बहुत प्रभाव रहा।

वे रामेश्वरम के इकलौते Newspaper Distributor थे।

वहां कलाम साहब ने उनके साथ काम में हाथ बटाया।

 

कलाम साहब बचपन से ही आसमान एवं

उससे जुड़े रहस्यों से बहुत मोहित थे।

वे हमेशा से ही आसमान की गहराइयो

को नापने की सोच रहे होते थे।

 

कलाम साहब के पिता उन्हें

एक Collector के रूप में देखते थे।

 

 

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समय बीता फिर कलाम साहब ने उच्च शिक्षा

Ramanthapuram के Schwartz हाई स्कूल में दाखिला लिया।

वहां उनकी मुलाकात Iyadurai Solomon से हूई।

वे उनके प्राचार्य थे।

कलाम साहब उनसे बेहद प्रभावित थे।

Solomon ने कलाम साहब को बताया था की

जीवन में महारत हासिल करने हेतु

आपको तीन चीज़ो को (master) करना जरुरी है।

वे तीन चीज़े है,

इच्छा या आकांक्षा

आस्था

उम्मीद या अपेक्षा

उसी स्कूल में रामकृष्ण अय्यर नामक एक गणित के शिक्षक थे 

कलाम साहब की उनसे बनती नहीं थी।

एक परीक्षा में कलाम साहब ने गणित में सबसे ज्यादा नंबर लाये

तो शिक्षक जी ने उनकी तारीफ़ की जो एक सरप्राइज की तरह था

कलाम साहब के लिए।

 

कॉलेज एवं नौकरी जीवन:-

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उसके बाद कलाम साहब ने

Trichy के  St.Joseph कॉलेज में दाखिला लिया।

वहां उन्होंने इंटर तक की पढाई की।

उसके बाद उन्होंने MIT (Madras Institute of  Technology)

में दाखिला लिया।

इसमें उनकी बहन ज़ोहरा एवं जीजा अहमद जलालुद्दीन

ने बहुत मदद की।

 

उनके कॉलेज का एक किस्सा बहुत प्रचलित है

उन्हें एक प्रोजेक्ट का जिम्मा सौंपा गया था।

एक low-level अटैक aircraft के design बनाने का

जिसमे उनके प्रोजेक्ट हेड उनके काम से बहुत नाखुश थे।

उन्होंने कलाम साहब को तीन दिन की समयसीमा दी।

एवं चेताया की अगर वे ये प्रोजेक्ट में सफल नहीं हुए

तो उनकी Scholarship रद्द कर दी जायेगी।

उन्होंने दिन-रात एक करके इस प्रोजेक्ट में सफलता पायी।

 

MIT के बाद वह

Bangalore के Hindustan Aeronautics  Limited (HAL)

एक Trainee के तौर पर गए।

वहां कलाम साहब ने एयरक्राफ्ट्स के बारे में बहुत कुछ जाना।

पूरा प्रशिक्षण लेने के बाद वे एक Aeronautical Engineer बन गए। 

 

 

स्वामीशिवानंदा से भेट:-

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Aeronautical Engineer में स्नातक

उत्तीर्ण होने के बाद उनके पास दो नौकरियों के ऑफर थे,

एक Air-force और दूसरा Ministry of Defence में

उन्होंने दोनों में Apply किया और दोनों का ही Interview call आ गया।

उसके चलते साहब निकल पड़े दक्षिण छोड़ उत्तर की ओर

जो की उनकी ज़िन्दगी की पहली उत्तर दिशा की यात्रा थी।

यहाँ ध्यान देने वाली बात है की

Air-force का साक्षात्कार देहरादून में था।

जबकि Ministry का दिल्ली में।

Ministry का interview देने के बाद

वे देहरादून की ओर प्रस्थान हुए।

इंटरव्यू में ज्यादातर जाने-पहचाने सवाल ही पूछे गए।

वे Air-force के इंटरव्यू के बारे में बताते है की

उस साक्षात्कार का वजन किताबी ज्ञान से

ज्यादा व्यक्तित्व (personality) पर था।

जिसके चलते वे 8 जगहों के लिए आये 25 आवेदनों में से

9वे स्थान पर रहे।

जो की एक प्रकार से उनका रिजेक्शन था।

इस प्रकार के रिजेक्शन से वे बहुत विचलित हुए।

उनके मन में ढेरों विचार उमड़ रहे थे।

उन्होंने ने धैर्य रखने की कोशिश की और

ऋषिकेश के लिए रवाना हुए।

वहां जाकर गंगाजी में स्नान किया।

उसी समय उनकी नज़र ऊपरी पहाड़ियों पर स्थित

Sivananda Ashram की और पड़ी

और वे अपने प्रश्नो के उत्तर खोजने हेतु वहां की और चल पड़े।

आश्रम में प्रवेश करते ही उन्हें

एक प्रकार की रहस्यमयी ऊर्जा महसूस हुई।

उन्होंने वहां देखा की

सफ़ेद दाढ़ी में बुद्धाजी का प्रतिरूप

उन्होंने स्वामीजी से अपनी व्यथा बताई की

कैसे वे अपने सपने से एक कदम की दुरी से हारकर लौटे

एवं अन्य सभी बातें स्वामीजी को बताई।

इस पर स्वामीजी कहते है,

यह निराशा को भूलकर तुम अपने निश्चित मार्ग पर ले

जाने से पहले का एक पड़ाव मात्र समझो।

 

अपने आप से एकत्व हो जाओ और अपने आप को भगवान की शरण में समर्पित कर दो।

मिनिस्ट्री ऑफ़ डिफेन्स में :-

dr vikram sarabhai and abdul kalam

 

सं 1958 में,  स्वामी sivananda से भेट के बाद

कलाम साहब आत्मविश्वास से ओत-प्रोत थे।

अब उन्होंने दिल्ली आकर

अपने मिनिस्ट्री वाले इंटरव्यू के बारे में

पूछ-ताछ करने पर पता चला की,

उन्हें Sr.Scientific Assistant की नौकरी प्रदान की गयी है।

जो की उन्हें हर महीने 250/- की पगार पर थी।

उसके बाद उन्होंने Kanpur , Bangalore ,Delhi में

मिनिस्ट्री के लिए Air-Division में बहुत काम किया।

उसके बाद उन्होंने TIFR, Bombay में काम किया।

इस दौरान उनका साक्षात्कार Dr.Vikram Sarabhai ने लिया।

Dr.Vikram Sarabhai 

भारत में Space Research के जनक माने जाते है।

उन्हें भारत में वर्तमान में चलित संस्था

ISRO (Indian Space Research Organization) के संस्थापक माने जाते है।

 

NASA का सफर  :-

 

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इसके बाद वे 6-mahine के लिए NASA गए।

एक प्रशिक्षण हेतु यह उनका पहला विदेश दौरा था।

वे प्रशिक्षण के लिए NASA के वर्जिनिया स्थित

Langley research center  में रहे।

इसी समय वे Godard स्पेस सेंटर एवं

Wallops flight facility भी गए थे ।

 

जब वे NASA से वापिस आये तब तक

भारत ने अपना पहला Rocket-launch किया

नाम था Nike-Apache

जो की NASA के द्वारा बनाया गया था।

इसके बाद पूरी टीम ने सोचा की हम भारत में ही

Satellite लॉन्चिंग व्हीकल्स जिसे

SLV  कहा जाता है।

 

इसके चलते टीम ने मिलकर

Rohini नामक sounding rocket बनाया।

इसी दौरान वे और उनकी टीम जिसका नेतृत्व

Dr.Vikram Sarabhai कर रहे थे,

ने

  1. RATO system
  2. MOVERS
  3. THRUSTERS
  4. EXPEDIENTS
  5. BUILDERS

 

पर काम किया था।

इस काम के बीच में दिल का दौरा पड़ने से

Dr.Vikram Sarabhai का देहांत हो गया।

उसके बाद Dr.Satish Dhawan ने बाकी कार्यो का नेतृत्व किया

कलाम साहब इन्हे गुरु मानते थे।

 

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पद्मभूषण :-

 

26 जनवरी 1981 ,

कलाम साहब को उनके कार्यो के लिए

पदम्-भूषण से नवाज़ा गया था।

उनके परिवार के लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया।

 

(balasore wheeler island

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उसके बाद

सन 1983 के दौरान उन्होंने

Agni

Prithvi पर काम किया

एवं उसे टेस्ट करने हेतु

उड़ीसा के Balasore जिले के

चांदीपुर में लांच करने का तय हुआ।

इसे Wheeler’s island भी कहा जाता है।

इसे आगे जाकर Dr.APJ Abdulkalam साहब का नाम दिया गया।

इस island को वे अपना “theatre of action” मानते थे।

यही से उन्होंने ने  Agni, Prithvi, Nag आदि Missiles का टेस्टिंग किया था।

 

कुछ समय पश्चात

1990 में उन्हें पद्म-vibhushan से नवाज़ा गया।

1997 में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा गया।

 

कलाम साहब ने 1998 मे,

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार द्वारा किए गए

Pokhran nuclear testing में भी अहम भूमिका निभाई थी।

 

1998 में ही उन्होंने विख्यात Cardiologist Soma-raju

के साथ मिलकर एक सस्ती kalam-raju नामक स्टेंट तैयार की।

 

अपने वैज्ञानिक जीवन में कलाम साहब ने

प्रोजेक्ट Devilएवं प्रोजेक्ट Valiant का नेतृत्व भी किया था।

 

dr apj abdul kalam books

 

कलाम साहब ने

  1. Wings of fire  (आत्मकथा)
  2. Ignited Minds
  3. India  2020
  4. Indomitable Spirits  

 

नामक किताबों का भी लेखन किया है।

 

प्रमुख स्वामी से आशिर्वचन :-

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प्रमुख स्वामी जो की

गुजरात के बहुचर्चित BAPS (Bochasanwasi Axar Purushottam)

स्वामीनारायण सम्प्रदाय के संस्थापक माने जाते है

उनसे Dr.APJ Abdul Kalam साहब के गुरु-शिष्य भेट होती रही।

इसमें ख़ास बात यह की कलाम साहब की स्वामीजी से विशेषतः 8 मुलाकातें हुई है।

जिसमे पहली नई दिल्ली के गुजरात विहार में हुई।

कलाम साहब प्रमुख स्वामी से बेहद प्रभावित थे।

इसके चलते उन्होंने Transcendence

नामक एक किताब भी लिखी

जिसमे उन्होंने प्रमुख स्वामी के साथ आध्यात्मिक अनुभवों का वर्णन किया है।

 

 

राष्ट्रपति जीवन :-

 

dr apj abdul kalam as a president

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वर्ष 2002, तत्कालीन NDA सरकार ने

कलाम साहब को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया।

उनके विरोध में Communist Parties की Lakshmi Sehgal को खड़ा किया गया।

कलाम साहब को 9,22,884 वोट्स मिले

जबकि Lakshmi जी को 1,07,366 वोट्स ही मिले थे।

 

 

Dr.APJ Abdul Kalam भारत के 11वे  राष्ट्रपति चुने गए

उनका कार्यकाल 2007 में खत्म हुआ जब

उन्होंने ने दूसरी बार नामांकन भरने से मना कर दिया।

वे भारत में Uniform Civil Code के लागु होने के समर्थक थे।

उन्हें प्यार से People’s President भी बुलाया जाता था।

वे सर्वपल्ली राधाकृष्णन एवं ज़ाकिर हुसैन के बाद तीसरे ऐसे

राष्ट्रपति थे जो की भारत रत्न से सम्मानित थे।

वे पहले ऐसे वैज्ञानिक थे जो राष्ट्रपति बने।

 

राष्ट्रपति जीवन के बाद :-

 

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राष्ट्रपति का पद छोड़ने के बाद कलाम साहब

IIM इंदौर , अहमदावाद एवं शिल्लोंग के Visiting Professor रहे।

इसके बाद वे अध्यापक रहे Banaras Hindu University

और aerospace engineering  के Anna University के

27 जुलाई 2015 को IIM Shillong  में

एक lecture देने के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ने के चलते

उन्होंने अंतिम सांस ली और इस महापुरुष के सफर का अंत हुआ।

 

वसीयत :-

कलाम साहब ने ताउम्र शादी नहीं की,

वे अविवाहित रहे।

एक कार्यक्रम के दौरान किसी ने उनसे पूछा की आपने शादी क्यों नहीं की

तो उन्होंने ने मजाक में कहा

वक़्त ही नहीं मिला शादी के लिए

 

अंत के समय उनके पास जो घर था,

उन्होंने अपने घर को रिसर्च कार्यो के लिए DRDO को दान कर दिया

इसके अलावा उनके पास की ढेर सारी किताबें लगभग (2500)

एक हाथ घडी

6-shirt

4-pant

3-suits

और एक जोड़ी जूते थे।

इसके साथ ही Dr.Kalam साहब जैसे महापुरुष के जीवन का अंत हुआ।

पर उनके विचार एवं सीख हम सब में अमर रहेगी।

 

 

Sources:- 1. Dr.APJ Abdul Kalam Autobiography (Wings of Fire)

                    2. Wikipedia

 

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