स्वास्थ्य ही सम्पदा है?…एक निबंध

 

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हमारा स्वास्थ्य ही हमारी सबसे बड़ी सम्पदा है।

ये कहावत आज के समय में बहुत ज्यादा फिट बैठती है।

इस कहावत का मतलब है की स्वास्थ्य से बड़ी सम्पदा

इस मानव जीवन में कुछ नहीं है।

हालांकि इंसान स्वास्थ्य से ज्यादा

धन सम्पदा को एकत्रित करने में

जीवन व्यर्थ कर रहे है।

इस Covid-19 की महामारी के बाद ज्यादातर लोग

इस बात को अच्छे से समझ चुके है।

 

स्वास्थ्य ही सम्पदा है?…एक निबंध

 

एक स्वास्थ्य काया सकारात्मक सोच

एवं मानसिक लाभ की भी वृद्धि कर सकता है।

बहुत से बुद्धिजीवी ये भी मानते है की

शरीर एक मंदिर की तरह है जहा से आध्यात्मिक

तरंगे और भी ज्यादा प्रबल होती जाती है।

 

पुरातन चिकित्सा पद्धति:-

 

अगर हम पुरानी चिकित्सा पद्धतियों पर नज़र

डालें तो पाएंगे की,

इस क्षेत्र में

सबसे ज्यादा योगदान चरक एवं शुश्रुत

द्वारा दिया गया है।

तथा उनकी आयुर्वेद के आचरणों

द्वारा ही हमारे पूर्वज अपने शरीर और

मन को स्वस्थ रखते थे।

 

यह हमने कई बार सुन भी रखा है की

रोज जल्दी सोये और जल्दी उठे ये

दिनचर्या भी शरीर को स्वस्थ रखने में

काफी फायदेमंद है।

सुबह जल्दी उठकर व्यायाम या

आधा घंटा पैदल चल लेने से

इंसान और भी ज्यादा जीवंत और

जिंदादिल हो जाता है।

 

आप मानोगे नहीं पर

रोज नहाना और अपने कपडे खुद

धोना एक अच्छी आदत है जो की

आपको गंभीर बीमारियों से बचने में

मदद कर सकती है।

 

खाने की आदत को भी ध्यान में रखना

आवश्यक है।

फ़ास्ट फ़ूड या जंक फ़ूड

आपके शरीर और मन को

स्वस्थ रखने में बिल्कुल

भी मददगार नहीं है।

 

इसीलिए जहा तक हो सके जंक फ़ूड या फ़ास्ट फ़ूड से

दुरी बनाये रखे।

 

श्री भगवद्गीता के अनुसार,

आप जो अन्न खाते है आपका

व्यक्तित्व भी उसी प्रकार हो जाता है।

 

जो लोग ज्यादातर ताज़ी

फल सब्जियाँ सेवन करते है,

वे सात्विक कहे जाते है।

 

जो लोग मांस आहार करते है

वे राजसिक कहे जाते है।

और जो बचा-कुचा, ठंडा बासी

खाते है वे तामसिक कहे जाते है।

 

किसी भी इंसान का बौद्धिक विकास

कई हद्द तक उसके खाने की

आदतों पर निर्भर करती है।

 

किसी इंसान के स्वस्थ होने का प्रमाण

उसके बौद्धिक, भावनात्मक, शारीरिक,

मानसिक एवं आध्यात्मिक मापदंडो

पर किया जाता है।

 

दुनिया में जैसे जैसे मोबाइल और

विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का

इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है।

वैसे ही इसके विपरीत परिणाम भी

मानव जाति पर दिखाई दे रहे है।

 

यह भी पढ़े:- मानव जीवन पर टेक्नोलॉजी के प्रभाव 

 

इन सब उपकरणों के ज्यादा इस्तेमाल से

मानव के शारीरिक एवं मानसिक प्रभाव

घबराहट, anxiety , अनिद्रा जैसी गंभीर

समस्याएं उत्पन्न हो रही है।

कई मामलों में कैंसर, अंधापन

की समस्याएं भी बढ़ रही है।

 

इंसानी स्वास्थ्य मापदंडो में

भावनात्मक विकास की भी बड़ी

भूमिका होती है।

एक भावनात्मक स्वस्थ व्यक्ति में

भावना, कुशल विचारों, एहसास,

दृष्टिकोण की

मात्रा होनी चाहिए।

 

स्वास्थ्य मंत्री

 

सामाजिक स्वस्थ इंसान

अपनी बातों को बेहतर तरीके से

जाहिर करता है।

लोगों से बिना किसी घमंड के

सकारात्मक सोच के साथ मिलता है।

वो दूसरों को मान – सम्मान प्रदान करता है।

 

आध्यात्मिक स्वास्थ्य की भी मानव

के स्वास्थ्य ही सम्पदा को पूरा करने में

महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।

अध्यात्म विकास मूल्यों (values)

पर आधारित होता है।

स्वस्थ इंसान हमेशा अपने साथ साथ

दूसरों तथा समाज के कल्याण पर

भी विचार करता है।

 

जीवन में काम, पढाई के साथ साथ

खेलों को भी महत्व देना जरुरी है।

जिससे शारीरिक तौर

पर स्वस्थ रहा जा सकता है।

किसी के भी व्यक्तिमत्व

को निखारने में

शारीरिक खेलों का

होना जरुरी है।

 

स्वास्थ्य ही संपदा है

 

क्या आपको पता है?….

 

हर वर्ष  विश्व स्वास्थ्य दिवस 

7 अप्रैल को मनाया जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा (WHO)

1950 के बाद से

स्वास्थ्य की और ध्यान आकर्षित करने हेतु मनाया जाता है।

 

बहुत से वैज्ञानिको तथा

बुद्धिजीवियों का मानना है की

जो इंसान सर्वांगीण तरह से स्वस्थ है।

वो बहुत ज्यादा धन, संपत्ति से समृद्ध

हो सकता है।

 

इसी के चलते कहा जाता है

की आपकी जीवनशैली संतुलित होना जरुरी है।

 

भारत के स्वास्थ्य मंत्री का नाम है।

श्री मनसुख मंडाविया  

 

“Health is Wealth” या

“स्वास्थ्य ही सम्पदा है”

यह बात अमेरिका के एक फिलोसोफर

राल्फ वाल्डो इमर्सन ने कही थी।

(Ralph Waldo Emerson)

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